आयाम का शाब्दिक अर्थ है-पक्ष यानि dimensions।जिस प्रकार हरेक वस्तु की लम्बाई,चौड़ाई और मोटाई होती है,उसी प्रकार हरेक व्यक्ति की अच्छाई,बुराई और गहराई होती है।
प्रत्येक मनुष्य के मूलतः तीन पक्ष होते है,यथा- व्यक्तिगत पक्ष,पारिवारिक पक्ष,सामाजिक पक्ष। इन पक्षों के निर्धारण करने में व्यक्ति की परवरिश,शिक्षा-दीक्षा,नौकरी-पेशा,रिश्ता-नाता,धर्म-कर्म,इत्यादि महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
सामान्यतया,व्यक्ति में जिस पक्ष की प्रमुखता हो जाती वह उसी के लिये मशहूर हो जाता है।जो अपने सारे पक्षों को उच्च कोटी का बना लेता है वे महामानव की श्रेणी में आ जाते है जिनकी संख्या नगण्य होती है।
बचपन से लेकर पचपन तक हम कई अवस्थाओं से गुजरते है,यथा-शैशवावस्था,युवावस्था एवं वृधावस्था।इन अवस्थाओं के दौरान हम अपने विभिन्न कर्तव्यों को निभाते है,जैसे कि-ज्ञानार्जन,अर्थोपार्जन,पारिवारिक एवं सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वाहन,आदि-आदि।
हम अपने जीवन के विभिन्न जिम्मेदारियों को कितनी ईमानदारी के साथ निभाते है,अपने कर्तव्यों का किस प्रकार पालन करते है,यही हमारी जिंदगी के विभिन्न आयाम को पोषण देता है एवं हमारे जीवन कि सार्थकता सुनिश्चित करता है।
प्रत्येक मनुष्य के मूलतः तीन पक्ष होते है,यथा- व्यक्तिगत पक्ष,पारिवारिक पक्ष,सामाजिक पक्ष। इन पक्षों के निर्धारण करने में व्यक्ति की परवरिश,शिक्षा-दीक्षा,नौकरी-पेशा,रिश्ता-नाता,धर्म-कर्म,इत्यादि महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
सामान्यतया,व्यक्ति में जिस पक्ष की प्रमुखता हो जाती वह उसी के लिये मशहूर हो जाता है।जो अपने सारे पक्षों को उच्च कोटी का बना लेता है वे महामानव की श्रेणी में आ जाते है जिनकी संख्या नगण्य होती है।
बचपन से लेकर पचपन तक हम कई अवस्थाओं से गुजरते है,यथा-शैशवावस्था,युवावस्था एवं वृधावस्था।इन अवस्थाओं के दौरान हम अपने विभिन्न कर्तव्यों को निभाते है,जैसे कि-ज्ञानार्जन,अर्थोपार्जन,पारिवारिक एवं सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वाहन,आदि-आदि।
हम अपने जीवन के विभिन्न जिम्मेदारियों को कितनी ईमानदारी के साथ निभाते है,अपने कर्तव्यों का किस प्रकार पालन करते है,यही हमारी जिंदगी के विभिन्न आयाम को पोषण देता है एवं हमारे जीवन कि सार्थकता सुनिश्चित करता है।
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