स्वच्छ वातावरण मिले,साफ
पानी मिले,पर्याप्त बिजली मिले,कामगारों को संतोषप्रद
रोजगार मिले,लोगों को एक भय-रहित समाज मिले,असमर्थों
को सामाजिक सुरक्षा मिले इस तरह की कल्पना हम सभी किया करते है।
वस्तुतः,अच्छे
दिन आदर्शवाद का प्रतीक है।जिसे कई वर्गों में विभाजित किया जा सकता है,यथा-व्यक्तिगत
जीवन के अच्छे दिन,सामाजिक जीवन के अच्छे दिन,सरकारी
तंत्र में अच्छे दिन,आदि-आदि।
व्यक्तिगत जीवन के अच्छे दिन
जब आप आत्मनिर्भर हो चुके होते
है और अपनी एवं अपने पर निर्भर जनों के आवश्यकताओं की पूर्ति भालिभांति कर पते है।अपने
मनोवांछित शिक्षा को प्राप्त कर चुके होते है,एक सम्मानजनक स्तर के बिजनेस
में स्थान पा चुके होते है,अपने आप को खुश एवं तरोताजा महसूस करते है तो इसे आप
अपने लिए अच्छा दिन कह सकते है।
सामाजिक जीवन के अच्छे दिन
जब आपके आस-पास के लोग,समाज
के लोग,राष्ट्र और अंतर्राष्ट के लोग भी खुश हों,उनके
मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में कोई विघ्न ना हो,उनके बीच परस्पर सामंजस्य हो,आपसी
क्लेश और हितों का टकराव ना हो,आपस में सौहार्द्य और भाईचारा हो तो ऐसी स्थिति को सामाजिक
क्षेत्र के अच्छे दिन कह सकते है।
सरकारी तंत्र में अच्छे दिन
जब प्रशासनिक कार्य लंबित ना
हो,बिना रिश्वत के भी तय समय सीमा पर,बिना
अड़चन के आपका कार्य सम्पन्न होने लगे।पदों की नियुक्ति-प्रक्रिया,निलंबन-प्रक्रिया,प्रशासनिक
कार्यों की निष्पादन-प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आ जाये,भ्रष्ट
आचरण ना हो।यहाँ तक की जन-भागीदारी भी सुनिश्चित हो तो यह एक अच्छे दिन का स्वरूप होगा।
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