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Tuesday, 15 December 2015

संवेदनहीन शिक्षक और छात्र संबंध के लिए जिम्मेदार कौन?

शिक्षा का व्यवसायीकरण संवेदनहीनता मुख्य कारण है। जहाँ तक जिम्मेदारी की बात है तो इसके लिये शिक्षक,छात्र,अभिभावक एवं समाजसेवक सबों की सम्मिलित भूमिका है।
 
शिक्षकों की भूमिका
अधिकांश शिक्षक अपनी नौकरी से असंतुष्ट होते है। वस्तुतः वे कोशिश किसी और नौकरी के लिये कर रहे थे,पर जब कुछ नहीं हुआ तो आ गये पढ़ाने।अनमने ढंग से और मात्र औपचारिकतावश वे पढ़ा रहे है।इस कार्य में उनकी कुछ खास रुचि नहीं है,खुशी भी नहीं है उन्हें।कई बार तो वे ऐसे-ऐसे विषयवस्तु को लिखा जाते जिनकी उन्हें खुद समझ नहीं,वे इसे लिखा इसलिए देते ताकि कोई देखे तो उनके ज्ञान का तारीफ करे।

छात्रों की भूमिका
उथली मानसिकता से ग्रसित छात्रों का एक बड़ा झुंड अपनी रकम वसूलने के लिये कक्षा में आते है।क्या पढ़ाया जा रहा है बहुतों को इनमें कोई रुचि नहीं है।वे आस-पास की चीजों और अपनी धुन में मस्त रहते है।पाठ्यसामग्री को छाप लेना ही ये अपना धर्म समझते है।

अभिभावकों की भूमिका
फसाद की जड़ में ये महानुभाव ही होते है।क्योंकि जो चीज ये खुद नहीं कर पाये अपने समय में उन चीजों को अपने बाल-बच्चों से करवाने की कसम खाये रहते है।अपने बच्चों की रुचि-अरुचि की परवाह किए बगैर,उन्हें ट्यूशन-पर-ट्यूशन देकर हथेली पर सरसों जमाने का ख्वाब देख रहे होते है।बच्चों को एक मशीन बना दिया जाता है।उनको सिर्फ टारगेट मिलता है संवेदना नहीं।

समाजसेवकों की भूमिका
ये संवेदनहीनता को प्रोत्साहित करने वाले अंतिम सिपाही होते है।ये गेस-पेपर,गाईड,एटम-बम,जैसे परीक्षापयोगी सामग्री तैयार करने वाले वर्ग होते है।जो बिना शिक्षक के परीक्षा उत्तीर्ण कराने का दावा करते है।इनका नारा होता है- “कोई नहीं तो हम है आपके,..हरेक कदम पर हम है आपके”।
अब आप ही बताइये जब शिक्षक का कोई काम ही नहीं पड़ेगा तो उनसे रिश्ता क्यों रखे कोई छात्र?

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