आगे का रास्ता कठिन दिखना या कम रोचक दिखना बड़ा कारण है भटकाव का।कई बार आर्थिक समस्याएँ और सामाजिक उपहास भी हमें भटका देती है।इसके अलावे असफलता का हाथ लगना या सफल ना हो पाना भी हमारे चित्त को अधीर कर देता है।
भटकना हमेशा बुरा नहीं होता।अंग्रेज़ी में एक कहावत है-"without deviation from the norm,progress is not possible"-इसे physics के law of reflection के concept पर आप समझ सकते है।
अगर लंबे समय तक कार्य करने से भी आपको सफलता नहीं मिल रही है तो अपने कार्य करने की शैली को बदलिये।इसे दिशा बदलना कहते है।यह भी भटकाव का ही एक रूप है,जो सकारात्मक है।वहीं ऊबकर या परिस्थिति से आहत होकर अपना मनोबल गिरा लेना और मार्ग बदल लेना भी भटकाव है,परंतु वह नकारात्मक है।
आप अगर सकारात्मक दिशा में भटकते है तो यह कल्याणकारी है।
भटकना हमेशा बुरा नहीं होता।अंग्रेज़ी में एक कहावत है-"without deviation from the norm,progress is not possible"-इसे physics के law of reflection के concept पर आप समझ सकते है।
अगर लंबे समय तक कार्य करने से भी आपको सफलता नहीं मिल रही है तो अपने कार्य करने की शैली को बदलिये।इसे दिशा बदलना कहते है।यह भी भटकाव का ही एक रूप है,जो सकारात्मक है।वहीं ऊबकर या परिस्थिति से आहत होकर अपना मनोबल गिरा लेना और मार्ग बदल लेना भी भटकाव है,परंतु वह नकारात्मक है।
आप अगर सकारात्मक दिशा में भटकते है तो यह कल्याणकारी है।
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