सबसे पहले अपनी कमजोरियों
की एक सूची बनायें।इसके पश्चात उसे घटते क्रम में सजा लें-यानि,सबसे
बड़ी कमजोरी सबसे ऊपर रखें।अब हरेक दिन अपनी सबसे बड़ी कमजोरी पर कुछ सुधारात्मक काम
शुरू करें।
आपने वरदराज की कहानी सुनी
होगी-“रसरी आवत-जात ते,सील पर परत निशान(Practice makes a man perfect“-ये आज भी प्रासंगिक है।लगातार प्रयास से आप अपनी सबसे बड़ी
कमजोरी पर भी विजय हासिल कर सकते है।
अपने में छोटा-छोटा सुधार
करना प्रारंभ करिए।ये सुधार आगे चलकर इतना बड़ा स्वरूप ले लेगा कि आपको विश्वास ही
नहीं होगा कि आप वही है जो पहले थे।आप पीछे पलटकर मत देखिये,सिर्फ
आगे चलिये,आज से।
रणनीतिकार का मानना है
कि-अगर बड़ी कमजोरी पर आप नियंत्रण कार लेते है तो छोटी-छोटी कमजोरी तो चुटकी में
आप निपटा देंगे।आपका आत्मविश्वास इतना प्रबल हो जाएगा कि आपका डर ही ख़त्म हो जाएगा।डर
ही हमें कमजोर बनाता है।
इतिहास भरा पड़ा है ऐसे
सुरमाओं से जो हमारे-आपके उम्र में कई कमजोरियों से ग्रस्त थे।उन्होने अपनी
कमजोरियों को हराया और वे असामान्य व्यक्ति बन गए-कालिदास से लेकर अन्ना हजारे जी
को आप याद कर सकते है।
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