“करो या मरो” की नीति सर्वोत्तम है अपने मार्ग में
आने वाली बाधाओं को ध्वस्त करने के लिये।
एक खिलाड़ी की भावना से अपने कार्य को अंजाम
दीजिये।एक अभिनेता के स्टाईल में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का जुनून पैदा
करिए।अपने सामने एक आदर्श रखिए और सदा उसके ऐसा बन जाने का प्रयत्न करिये।
विवेकानन्द जी ने कहा-“हजार बार गिरकर भी उठने का
साहस मत छोड़ो।“ आप ऐसा करके दिखाईये।आपसे क्यूँ नहीं होगा,एकदम
होगा,ऐसी स्वप्रेरणा खुद को दीजिये।अपना उत्साहवर्धक खुद बनिये।
आप जितनी बार असफल होते है,उतनी
बार सीखते है।अपने अनुभवों को एकाग्र करिये और बहुगुणे उत्साह के साथ अनवरत प्रयास
करिये। दौड़िये,गिरिये,धूल झड़िये और पुनः गतिशील हो जाइए।जिद्दी बनिये
अपने लक्ष्य को पाने के हेतु।
भौतिकी विज्ञान कहता है-अगर घर्षण न हो और आपके आगे
बढ़ने पर घर्षण बल,जो आपको आगे ढकेलता है,काम
न करे तो आप फिसल जायेंगे,आगे बढ़ ही नहीं पायेंगे।उसी प्रकार अगर आपके सामने
विरोधी और बाधाएं न हो तो आप तरक्की ही नहीं कर सकते।
लोग आपकी टाँग खींच रहे हो तो उन्हे खींचने दीजिये।
इससे आपका टाँग मजबूत बनेगा और आप लंबी दूरी तक चल पायेंगे।विरोधियों को,विपत्तियों
को,बाधाओं को अपना काम करने दीजिये,आप अपना काम कीजिये।
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