इतनी भीड़ है,
इस शहर में,
सुध नहीं,किसी को,
अपनी ही,बजह पर।
इस शहर में,
सुध नहीं,किसी को,
अपनी ही,बजह पर।
आगे निकलने की
होड़ है,लेकिन
सारे रुके हुये है,
अपनी ही,जगह पर।
अपने-अपने,सपने के
महल में,
फँसे हुये से,घुट रहे,
अपनी ही,फतह पर।
होड़ है,लेकिन
सारे रुके हुये है,
अपनी ही,जगह पर।
अपने-अपने,सपने के
महल में,
फँसे हुये से,घुट रहे,
अपनी ही,फतह पर।
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